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TMC में बगावत के बाद ममता का सहारा बनी सड़क की सियासत! क्या बच पाएगी पार्टी?

पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी फिर सड़क की राजनीति पर लौट आई हैं। पार्टी में बगावत और हमलों के बीच टीएमसी को एकजुट रखना उनकी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Mamata Banerjee || Mamta Politics || TMC Crisis || Protest Against Attack || West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आने के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी एक बार फिर सड़क की राजनीति का सहारा लेती नजर आ रही हैं। सत्ता से बाहर होने के बाद उनके सामने केवल राजनीतिक अस्तित्व बचाने की नहीं, बल्कि पार्टी को टूटने से रोकने की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

ममता नहीं हटने वाली पीछे

TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों, पार्टी कार्यालयों को नुकसान पहुंचाने और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों को लेकर ममता लगातार BJP सरकार पर निशाना साध रही हैं। इसी के विरोध में उन्होंने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक आंदोलन का संकेत दिया है। हालांकि कोलकाता में प्रस्तावित धरने को प्रशासन की मंजूरी नहीं मिली, लेकिन ममता पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहीं।

विधायक और नेता बना रहे है TMC से दूरी

पार्टी के भीतर भी हालात आसान नहीं हैं। कई विधायक और नेता दूरी बनाते नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ पर पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हैं। सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी के अंदर बढ़ती बेचैनी और गुटबाजी ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और जनता से सीधा जुड़ाव है। सिंगूर और नंदीग्राम जैसे आंदोलनों से सत्ता तक पहुंचने वाली ममता अब उसी सड़क संघर्ष की रणनीति के जरिए अपने समर्थकों को फिर से एकजुट करने की कोशिश कर रही हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ममता का आक्रामक आंदोलन, बंगाली अस्मिता का मुद्दा और उनका जुझारू नेतृत्व टीएमसी को नए संकट से उबार पाएगा या फिर पार्टी के सामने मुश्किलें और बढ़ेंगी।

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